प्रकाशीय समावयवता (Optical Isomerism)

यह पाया गया कि केवल वे ही क्रिस्टल तथा अणु, जिनके दर्पण प्रतिबिंब अध्यारोपित (superimpose) नहीं होते, प्रकाशत: सक्रिय होते हैं। ऐसी संरचना को असममित कहते हैं।

बहुत से पदार्थ ठोस अवस्था में ही प्रकाशत: सक्रिय होते हैं, जैसे स्फटिक, सोडियम क्लोरेट आदि। सर्वप्रथम ज्ञात, प्रकाशत: सक्रिय पदार्थ स्फटिक ही है, जिसके क्रिस्टल दो प्रकार के, एक दक्षिणवर्त और दूसरा वामावर्त, होते हैं। ये दोनों क्रिस्टल एक दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब हैं और अध्यारोपित नहीं होते। क्रिस्टल के ऐसे जोड़ों को प्रतिबिंब रूप (enantiomorphs) कहते हैं। स्फटिक के गलाने पर इसकी सक्रियता लुप्त हो जाती है। इसलिए स्फटिक की प्रकाशत: सक्रियता उसके असममित क्रिस्टल संरचना के कारण होती है। इस वर्ग के पदार्थ प्रकाशत: सक्रिय तभी तक रहते हैं जब तक वे ठोस रूप में होते हैं और गलने पर, वाष्पीकरण से तथा विलयन में इनकी सक्रियता नष्ट हो जाती है।

बहुत से यौगिक ठोस, गलन, गैसीय या विलयन अवस्था में भी प्रकाशत: सक्रिय होते हैं, जैसे ग्लूकोज़, टार्टरिक अम्ल आदि। इनकी सक्रियता यौगिक की अममित आणविक संरचना के कारण होती है। इस अणु और उसके दर्पण प्रतिबिंब को प्रतिबिंब रूप, प्रकाशीय प्रतिविन्यासी (optical antipodes) या प्रकाशीय समावयवी कहते हैं।

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